शुक्रवार, 12 सितंबर 2008

क्या है कामायण

मित्रों हम उस देश और संस्कृति के लोग हैं जहाँ काम को पूजा के रूप में स्वीकार किया गया है। ... लेकिन इस देश की मौजूदा स्थिति यह है कि समाज ने काम को गन्दा कहना शुरू कर दिया । काम यानि प्रकृति का वह कर्म जो वास्तविक आनंद देता है, सम भोग के माध्यम से समाधि की ओर ले जाने का रास्ता दिखाता है और जीवन के सृजन का बीज मंत्र अंगीकार करता है। काम (अंगरेजी में सेक्स ) की प्राकृतिक रचना शायद उतनी ही पुराणी है जितनी यह दुनिया और इसका जीवन । काम के बिना जीवन की कल्पना भी नही की जा सकती है । इसी बीज मंत्र को लेकर यह ब्लॉग शुरू किया जा रहा है। यह बिल्कुल शालीन मंच होगा जहाँ आप काम के विषय में अपनी राय जाहिर कर सकेंगे। हर दिन काम की नई व्याख्या के लिए हम हाज़िर रहेंगे और आपका इंतजार भी करेंगे। कोशिश है की कमायण हम सबको सुना सकें। ध्यान रखिये की काम की रचना के रूप में ईश्वर ने जीवन को स्वरूप दिया है।

3 टिप्‍पणियां:

Mukesh ने कहा…

Hope to see the brighter side of the subject. Congratulations.

Manish4all ने कहा…

Good effort. Try to add some material for young generation.

Vish ने कहा…

The choosen subject is what most of youths have stumble upon. I appreciate that you have selected the topic to disucss openly, so that the real aspect of Sex (not the one that we have been listening) can be understood.