रविवार, 14 सितंबर 2008

वासना है अप्रतीम ऊर्जा

कुछ शब्दों के साथ वक्त बहुत क्रूर खेल खेलता है। वासना शब्द वक्त की ऐसी ही क्रूरता का शिकार हुआ है। इस शब्द को कुछ इस तरह प्रचारित किया गया जैसे यह जीवन की पवित्रता को नष्ट करने का परिचायक हो। जबकि वास्तविकता इसके ठीक विपरीत है। वासना वस्तुतः उस उर्जा का परिचायक है जो जीवन के लिए न केवल बीज उत्पन्न करता है बल्कि जीवन की निरंतरता को बनाये रखता है। क्या कभी आपने इस बात पर गौर करने की कोशिश की है की वासना की यह उर्जा ही समभोग के लिए शक्ति पैदा करती है और जीवन के अप्रतीम मधुर सौंदर्य का सृजन भी करती है। ... एक ऐसा सौंदर्य जो सृष्टि में और कहीं दिखाई नही देती। इसी उर्जा के सृजनकर्ता के रूप में हमारी संस्कृति ने कामदेव और रति की कल्पना की। हमने कामदेव को पूजा रति के श्रींगार को अपना बनाया लेकिन वक्त के साथ संस्कृति में जो बदलाव आते चले गए या जो कुरीतियाँ शामिल होती चली गयीं , उनहोंने वासना शब्द को कुछ इस तरह प्रचारित कर दिया कि इसका मतलब केवल नर और नारी का एक दुसरे से मिलन हो कर रह गया। इस शब्द की पवित्रता नष्ट हो गयी। उस उर्जा को अस्वीकार कर दिया जो जीवन का बीज मंत्र था । हाँ इस बात में कोई संदेह नही कि उर्जा का चैनालिजेशन यदि नही किया जाता है तो किसी भी और उर्जा की तरह इसका भी विनाशकारी स्वरूप दिखना स्वाभाविक है। हमें इस सच्चाई पर भी गौर करना चाहिए कि वासना की इसी उर्जा से सृष्टि का सबसे मधुर और आनंद दायक खेल उत्पन्न हुआ जो आज भी सबसे बेहतरीन मनोरंजन है। जरुरत इस बात की है कि हम इस उर्जा को समझें और जीवन का आनंद उठायें। इसकी पवित्रता को समझेंगे तो पवित्र और आनंद दायक स्वरुप सामने आएगा ... गन्दा समझेंगे तो गन्दा स्वरुप सामने आएगा। सब कुछ हमारी सोच पर निर्भर करता है।

शुक्रवार, 12 सितंबर 2008

क्या है कामायण

मित्रों हम उस देश और संस्कृति के लोग हैं जहाँ काम को पूजा के रूप में स्वीकार किया गया है। ... लेकिन इस देश की मौजूदा स्थिति यह है कि समाज ने काम को गन्दा कहना शुरू कर दिया । काम यानि प्रकृति का वह कर्म जो वास्तविक आनंद देता है, सम भोग के माध्यम से समाधि की ओर ले जाने का रास्ता दिखाता है और जीवन के सृजन का बीज मंत्र अंगीकार करता है। काम (अंगरेजी में सेक्स ) की प्राकृतिक रचना शायद उतनी ही पुराणी है जितनी यह दुनिया और इसका जीवन । काम के बिना जीवन की कल्पना भी नही की जा सकती है । इसी बीज मंत्र को लेकर यह ब्लॉग शुरू किया जा रहा है। यह बिल्कुल शालीन मंच होगा जहाँ आप काम के विषय में अपनी राय जाहिर कर सकेंगे। हर दिन काम की नई व्याख्या के लिए हम हाज़िर रहेंगे और आपका इंतजार भी करेंगे। कोशिश है की कमायण हम सबको सुना सकें। ध्यान रखिये की काम की रचना के रूप में ईश्वर ने जीवन को स्वरूप दिया है।